आओ हम,
जानने का प्रयत्न करें
जीवन का सार
और सारांश
कि हमें
जन्मोपरांत निरंतर-प्रतिक्षण
काल को पकड़ना है
कभी तीव्र दौड़ाक बन
तो कभी कछुए की तरह
जानते हुए कि नियति
निश्चित है
जन्मोपरांत मृत्यु निश्चित है
तभी पा सकेंगे
मुक्ति-क्षण
जीवन का सार
तो फिर सारांश क्या है
वही तो
जो जो हमारे व तुम्हारे
संपर्क में आए
और वे जो
हमारे संसर्ग से सृष्ट हुए
इन सभी के प्रति हमने
कैसे जिया वह
स्मृति-शेष ही तो होगा
देखना यह नहीं कि
कौन था, किसका और कैसा था
इतिहास अपना-अपना
और कि
कोई कितना अनुकूल रहा
यह भी नहीं होगा महत्वपूर्ण
मुक्ति-क्षण कोई
आसमानों से परे
आकाश-गंगाओं से आगे
बैकुंठ में स्थित
किसी क्षीर-सागर में नहीं
वास्तव में वह
उतना-उतना ही प्राप्त होगा
हम को, तुम को और उन सब को
जो जितने-जितने
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त
प्रतिकूल के विरुद्ध छिड़े युद्ध में
समर्पित हुए होंगे।
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अनहद कृति पर लिंक है :-http://www.anhadkriti.com/pushpraj-chaswal-hindi-divas-2015-smriti-sheSh
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