गुरुवार, 30 अगस्त 2018

स्मृति-शेष





आओ हम, 
जानने का प्रयत्न करें 
जीवन का सार 
और सारांश 
      कि हमें
      जन्मोपरांत निरंतर-प्रतिक्षण 
      काल को पकड़ना है 
      कभी तीव्र दौड़ाक बन 
      तो कभी कछुए की तरह 
जानते हुए कि नियति 
निश्चित है
जन्मोपरांत मृत्यु निश्चित है 
तभी पा सकेंगे 
मुक्ति-क्षण 
जीवन का सार 
      तो फिर सारांश क्या है 
      वही तो 
      जो जो हमारे व तुम्हारे 
      संपर्क में आए
      और वे जो 
      हमारे संसर्ग से सृष्ट हुए
      इन सभी के प्रति हमने 
      कैसे जिया वह 
      स्मृति-शेष ही तो होगा  
देखना यह नहीं कि 
कौन था, किसका और कैसा था
इतिहास अपना-अपना 
और कि 
कोई कितना अनुकूल रहा 
यह भी नहीं होगा महत्वपूर्ण 
      मुक्ति-क्षण कोई 
      आसमानों से परे 
      आकाश-गंगाओं से आगे 
      बैकुंठ में स्थित 
      किसी क्षीर-सागर में नहीं 
वास्तव में वह 
उतना-उतना ही प्राप्त होगा 
हम को, तुम को और उन सब को 
जो जितने-जितने 
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त 
प्रतिकूल के विरुद्ध छिड़े युद्ध में 
समर्पित हुए होंगे। 
---------------
अनहद कृति पर लिंक है :-http://www.anhadkriti.com/pushpraj-chaswal-hindi-divas-2015-smriti-sheSh

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें