शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

क्षणिका

मन चाहता है कभी

अपनी-पराई चिन्ताएं सभी
सफ़ेद कबूतर बना
ऊपर उड़ा दूँ,
इतने ऊपर
कि, इस अन्धेरे में
बन नक्षत्र
करें दिशाएं प्रशस्त
भूले-भटकों की।

 

- डॉ. प्रेम लता चसवाल 'प्रेमपुष्प'

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