शनिवार, 20 सितंबर 2014

अनपेक्षित क्षण (पुष्पराज चसवाल)

खिलौने टूटने पर
रो पड़ते हैं बच्चे
और कुछ लोग
दिल टूटने पर।
दूसरे हैं जो छटपटाते
परिवार टूटने पर
कितने हैं जो
सुन सकते
टूटते क्षणों की
बिखरते मूल्यों की
ख़ामोश आवाज़।
आओ,
अनपेक्षित क्षणों में
राष्ट्र को ना टूटने दें
टूटे हुए परिवार जुड़ सकते हैं
और
नए खिलौने बन सकते हैं।
एक बार फिर टुकड़े हुआ राष्ट्र
जुड़ न सकेगा कभी!

-पुष्पराज चसवाल 

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